शनिवार, 28 मार्च 2015

मधु सिंह : रंग धानी दे गया
















          


जगजीत सिंह को समर्पित



जाते -जाते  वो मुझे इक ऐसी कहानी दे गया 
के खुशबू अपनी रंग अपना जाफरानी दे गया

चंद लम्हों को सजा कर लिख दिया ऐसी किताब 
ले   सफे  से  हाशिए  तक  रंग  धानी दे गया 

एक शख्स जो फ़िरता रहा एक बूँद पानी के लिए 
उसकी   आँखों  में  समंदर की रवानी दे गया

एक सूखे   शजर  से  वो इस कदर लिपटा रहा
के कर हरा उस शजर को फिर से जवानी दे गया 

एक झटके में उठा कर अपने चेहरे से  हिज़ाब
देखते ही  देखते  खुदा -ए -जाविदानी  दे गया *

*दैवी शाश्वतता
 


                                            मधु "मुस्कान "





रविवार, 22 मार्च 2015

मधु सिंह : तू जिधर जायगा मैं उधर जाऊँगी



इश्क में टूट कर गर बिखर जाउँगी
ये बताओ  जरा  मैं  किधर जाउँगी

तेरी चाहतों  को खुदा  मैंने माना
तुझे  पास  पाकर   मैं निखर जाउँगी

आईना तेरी आँखों का सामने देख कर
 देखते -   देखते  मैं  सवंर जाउँगी
  
 कहाँ  से कहाँ ला दिया आशिकी नें  
तू जिधर जायगा मैं उधर जाऊँगी  

दूरियाँ इस कदर दरम्याँ जो रहीं 
टूट डाली कली सी बिखर जाऊँगी 


                                     मधु "मुस्कान "