गुरुवार, 10 जुलाई 2014

मधु सिंह : कामना के पुष्प (थेम्स की घाटी,यू .के.से )



जब  गीत  मय   अस्तित्व  दोनों  के  मिलेंगें
सुरभित  कामना के  पुष्प  अधरों  पे खिलेंगें

नील    नभ     पर    चांदनी    इर्ष्या   करेगी
जब  बाहु- भुज में  आबद्ध  हम धू -धू जलेंगे

पहन   कुसुमों   के  बसन   जब   हम  हसेंगे 
नील नभ के  निर्मल  हृदय में हलचल करेंगे

जब  ले  विभा  की  ज्योति  हम  चंचल  बनेगें  
हिम शैल-शिखरों पर तुहिन कण चुम्बन करेंगे

रे दामिनी ! जिस  ठौर  हम आलिगन  करेंगे 
त्रिपथगा के पुण्य जल से देवगण तर्पण करेगे


                                     मधु "मुस्कान "