सोमवार, 22 अक्तूबर 2012

2.Madhu Singh :Mera Sauhar









  




 मेरा शौहर

मेरा शौहर भी क्या चीज़ है 
जरा खफ़ा हुआ तो कहता अजीब है
गर खुश हुआ तो पल ही में 
बड़े अंदाज़ से कहता अज़ीज़ है 
यह अन्दाज़ उसका कितना लज़ीज़ है 
वो  मेरे  बेहद करीब है 
मेरी जिंदगी का ज़रीब है 
वो मेरी सुबह की पूजा और 
शाम का हबीब  है 
दरअसल वो एक रफ़ीक  है 
वो  जितना मेरे  करीब है 
उससे ज्यादा ,कहीं उसके करीब  है
दिखने में लगता बेहद शरीफ़ है 
पर, एक छुपारुस्तम  शातिर     
और वेहद खूबशूरत बत्तमीज़ है 
वो जो भी है मेरा शौहर है,मेरा मुरीद है 
मेरा नसीब है ,हाय! कितना अज़ीज़ है 

                                मधू "मुस्कान "