रविवार, 15 सितंबर 2013

मधु सिंह : दिल उगाना चाहता है


 दिल  उगाना चाहता है






वो   मुझको   अपना   बनाना   चाहता है
मेरे दिल पर अपना दिल उगाना चाहता है

 इक हादसे में  कट  गये  दोनों हाथ मेरे 
वो अब मुझको अपना हाथ देना चाहता है

आज-कल  बहुत खामोंशियों में जी रहा है
मेरी  आवाज़  मुझसे  माँग  लेना चाहता है

बदले  वक्त  की ताबीज़ पहना कर मुझे
फ़साना को कोई अंजाम देना चाहता है

बहुत उकता गया है अपनी जिंदगी से वो
मेरे दिल में वो इक घर बनाना चाहता  है

परछाई बन मेरी वो साथ चलना चाहता है
वो मुझसे , मुझी को मांग लेना चाहता है 

                           मधु "मुस्कान"
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9 टिप्‍पणियां:

  1. जैसा नाम वैसी ही मधु मिश्रित रचना |
    आशा

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज सोमवार (16-09-2013) गुज़ारिश प्रथम पुरूष की :चर्चामंच 1370 में "मयंक का कोना" पर भी है!
    हिन्दी पखवाड़े की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. वो मुझको अपना बनाना चाहता है
    मेरे दिल पर अपना दिल उगाना चाहता है
    --
    बहुत खूब मधु जी -बहुत सुन्दर !
    latest post कानून और दंड
    atest post गुरु वन्दना (रुबाइयाँ)

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  4. बहुत उकता गया है अपनी जिंदगी से वो
    मेरे दिल में वो इक घर बनाना चाहता है...

    बहुत खूब !!! सुंदर गजल के लिए बधाई ! बधाई मधु जी,,,

    RECENT POST : बिखरे स्वर.

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  5. वाह क्या बात है," तयललुक इक नाम पाना चाहता है.............,हथेली पर उगाना दिल बहुत आसान है लेकिन,वो मेरे दिल पर हथेली उगाना चाहता है............, ये मुमकिन है कि दिल अपना दान कर दूँ ,
    बहुत ख़ूब

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  6. बहुत उकता गया है अपनी जिंदगी से वो
    मेरे दिल में वो इक घर बनाना चाहता है................बहुत सुन्दर ...........

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  7. इक हादसे में कट गये दोनों हाथ मेरे
    वो अब मुझको अपना हाथ देना चाहता है ...
    क्या बात है .. ये तो इन्तहा है प्रेम की ... लाजवाब शेर ...

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