शुक्रवार, 22 मार्च 2013

मधु सिंह : मेरा नसीब है

         मेरा  नसीब  है 



      कि   तू  ,  और   तू   हीं  तू है 
     मेरी   जिंदगी   मेरा   नसीब है 

     ये    जो    हुश्न    है ,   फ़रेब है 
     ये    इश्क   कितना   अज़ीब है 

     ये   खुलूस   है  ,  ये   अज़ाब है 
     तूँ   मेरी  जिंदगी  का  ज़रीब है 
   
     तेरा   हुश्न    है,  मेरा   इश्क है 
     यही  सलीब   है  यही  नसीब है 

     धुवाँ  -धुवाँ  है  ये  जो उठ रहा 
     मेरे  दिल  में  है,  औ क़रीब है 

     जाँ   तो  दे  दूँ  तेरे   इसारे  पर  
     हाय, ये  दिल तो तेरा  हबीब है 

     मुंतजिर   हूँ  मैं  ता - उम्र का
     मैं  तेरा  मुरीद हूँ, तू  खतीब है 

     यही   अर्ज़   है   यही   फ़र्ज़  है
     तेरा  इश्क   दिल  के  करीब है 
  
           ख़ुलूस -सच्चाई ,अज़ाब -दर्द /कष्ट ,खतीब -उपदेशक (इस्लाम  धर्म का ),हबीब -दोस्त 
        ज़रीब -मापने का उपकरण  ,मुंतजिर -इंतजार करने  वाला       
               मधु "मुस्कान"