बुधवार, 20 मार्च 2013

मधु सिंह : इधर मौत ने छुआ

  
इधर  मौत  ने  छुआ
         
         
 जब भी छुआ है मौत ने बड़े प्यार  से छुआ 
 है किसकी बद्दुआ यह,है किसकी यह दुआ
   
 छोड़ी  नहीं  है  हमने अभी दामने -उम्मीद  
 कत्बों  पे लिख दिया मेरे मक्तूल की दुआ  

 कुछ  दूर  ही चला  था  ले  तिश्नगी लबों पर 
 लम्हाते  -  तीरगी  ने   बड़े  प्यार  से  छुआ 

  ये   इश्क़े   जुस्तजू  थी  या  हुश्ने  - गुफ्तगू 
  मेरा  चाहने  वाला  ता -उम्र मेरा नहीं  हुआ 

 ज़ज्बात   ज़िन्दगी   के   यूँ   खामोस  हो गए 
   उधर वो क्या  गया कि इधर मौत  ने  छुआ 

 कत्बों -समाधि   लेखों , मक्तूल - जिसका  क़त्ल  हो , तीरगी -अंधेरा 
                                          मधु """ मुस्कान "