रविवार, 9 जून 2013

मधु सिंह :मचलती ख्वाहिशों का क्या होगा

  मचलती ख्वाहिशों का क्या होगा 

  फ़लक से तोड़ कर तारे सज़ा दूँ तेरी ज़ुल्फों में 
 बना धडकन बसा लूँ ख्वाहिसों में आज मैं अपने 
या झुलस जाऊ तपन में तेरी सांसों की 
सिमट आगोश में तेरे लिपट जाऊ मैं सीने से 
हर खुशबू से  तेरी  ही खुशबू निकलती है 
सवारूँ तेरी जुल्फों को बिठा आगोश में अपने 
चला जाउं कहीं मैं दूर धरती से, ले हाथ तेरा हाथ में अपने 
 सुना दूँ दिल की धडकन ,रख दिल अपना  ,दिल पर तेरे

बता दे आज तू जानम,  मेरे इन मचलती ख्वाहिशों का क्या होगा
                                                                                    मधु "मुस्कान "