गुरुवार, 15 नवंबर 2012

15.Madhu Singh :Jshn

 जश्न 

जिन्दगी  के  जश्न को  जी  भर  मनाना  चाहिए   
गम  हजारों  हों  भी  तो  क्या  मुस्कुराना चाहिए

भटकना दर्द के सहरा  में भूल कर  भी मत कभी
समंदर की हंसी लहरों को सीने में बसाना चाहिए

रहगुज़र तो  डूबी  हुई है  गुमनामी के अंधेरों  में
बन दिये की सुर्ख  लौ अंधेरों को मिटाना  चाहिए

कभी भी भूलकर भी मत रुलाना प्यार को तुम
प्यार के हर पलों  में   वफ़ा के रंग भरने चाहिए

लबोँ से कभी भी रूखसत न होने पाए मुस्कुराहट
जिन्दगी के चमन में  गुले-खुशबू  उड़ाना चाहिए

न रोना कह कभी भी बेचारगी में जी रहें हैं जिंदगी
ले दिलों में प्यार की पाकीज़गी चहचहाना चाहिए 

हँसी मासूम-सी बच्ची की दिलों में अपने बसाकर
मोहब्बत दिल का नग्मा है इसे गुनगुनाना चाहिए

ये दुनिया है  बड़ी ही सिरफिरी ऊँगली तो उठाएगी
काट उनकी उंगलीओं को उनको ही थमाना चाहिए


                                           मधू "मुस्कान"