सोमवार, 12 नवंबर 2012

13.Madhu Singh: Bn Dip Khud Ko Jalayen

बने दीप खुद हम खुद को जलाएँ 


चलो आज हम सब दिवाली मनाएँ 
बने दीप  खुद हम, खुद को जलाएँ 

बने रोशनी हम सभी के दिलों की 
चेहरों पे सब के तबस्सुम खिलाएँ

अमीरी गरीबी की नफ़रत मिटाएँ
दिलों से सभी के दिलों को मिलाएँ

आँखों  में आसूँ  दिखे न किसी के
दुनिया नई हम  एक ऐसी  बनाएँ 

भूख  से अब  न कोई  रोता  दिखे
दिलों में मोहब्बत के दीए  जलाएँ 

नफ़रत की  आंधी  हम रोक कर
प्यार की एक ऐसी ज्योती जलाएँ

गर दिखे कोई रोता कहीं  भी हमे
उठा अपने सीने से उसको लगाएँ

हम सब बने एक माँ की मोहब्बत
धरा पर  मोहब्बत के  दीए जलाएँ

हर दिवाली को ऐसी दीवाली बनाएँ
बन दिया प्यार का  ख़ुद को जलाएँ

                              मधू "मुस्कान"