शनिवार, 3 नवंबर 2012

7.Madhu Singh : sharmaya

  
 
   शर्माया
  
 बहुत  शर्माया  आज  साजन  मेरा 
 न पलकें  उठाया  न  नज़रें मिलाया  

उसने की ही है ऐसी खता खूबसूरत 
देख  कर  वो मुझे है  नज़रें झुकाया 
   
 चाहा था उसने  कि  बाँहों  में भर लूँ
पास आते ही मैंने उसे ठेंगा  दिखाया 

बहुत  दिल  में  वो  अपने बुदबुदाया 
गुस्से  से  झटका  दे  मुझको  हटाया 

देख  चेहरे पे  उसके  सुर्ख मायूसियां 
दौड़  ख़ुद  उसको  मैंने  सीने  लगाया 

मुस्कुराया  बहुत  इस अदा पर मेरे वो 
कुछ पल रुको  कह वो  बहुत घबराया 

बड़ा सिरफिरा है मेरा  साजन सलोना 
प्यार से लड़ना उसने मुझको सिखाया

जाता हूँ  कहता  है ,पर जाता  नहीं  हैं
रसोई में पीछे से कैसे  ठुमका लगाया 

देखा जो मैंने नकली गुस्से  से उसको 
न आऊंगा पास कह कह आंसू बहाया  

                                    मधू  "मुस्कान"