शुक्रवार, 2 नवंबर 2012

6.Madhu Singh: Sajan

      













       सजन 
सजन तुमने  ही तो  हमको  शराबी  बनाया 
निगाहों से जी भर- भर कर  मुझको पिलाया 

कभी  बाँहों  में  भर- भर के  मुझको  सताया 
जिश्म को  पोर को छू -छू कर चंदन  बनाया

सताया बहुत  मुझको पाकर अकेले में तुमने  
कभी जुल्फें सवारीं  तो  कभी  आँचल  उड़ाया

सितम कितने  ढाए  कितना दिल को रुलाया   
कभी मेहंदी रचाया तो  कभी बिंदियाँ सजाया 

दिल के तारों को तुमने कितना छेड़ा बहक कर 
कभी  पायल  उतारी  तो कभी  नथुनी  सजाया 

भोले दिखने में सजन तुम तो लगते  बहुत हो 
कितना शातिर सजन मेरा जो मुझको है भाया 

                                       म "मुस्कान"