रविवार, 3 फ़रवरी 2013

58 .मधु सिंह : छुट्टा सांड़

                                                    छुट्टा सांड़ 
          

      कल   तलक  जो  कैद  थे  जेल  की  दीवार में   
      दिख  रहे   हैं  आज  वो ,  देश  की  सरकार में 

      रात  में  जो  रहजनी  के  खेल में  थे होशियार 
      हैं  बिक  रहे उनके कलेण्डर  देश के बाज़ार में

      जिस  मुल्क  के रहनुमा अन्धें हो जल्वागाह के
      मुफलिसी   बिक  जायगी  जिस्म  के बाज़ार में      
   

     जितने  शातिर  चोर थे  या  थे चम्बल के डकैत    
     छुट्टा  सांड  बन  फ़िर  रहें  हैं  दिल्ली   दरबार में   

      मूर्ति  चोरी  ज़ुर्म में , जो कल  गया  था जेल में      
      बन  पुजारी आ  गया ,  भगवान   के  दरबार में 

      जिसने   लूटी   आबरू   घुस   घरों   में  बार  -बार 
      सामिल हो गया  है आज वह ,मुल्क की सरकार में 
                                                        मधु " मुस्कान " 
     

   
     

24 टिप्‍पणियां:

  1. मूर्ति चोरी ज़ुर्म में जो कल ही गया था जेल में
    बन पुजारी आ गया , भगवान के दरबार में

    यही हो रहा है - सटीक

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  2. कल तलक जो कैद थे जेल की दीवार में
    दिख रहे हैं आज वो , देश की सरकार में

    रात में जो रहजनी के खेल में थे होशियार
    हैं बिक रहे उनके कलेण्डर देश के बाज़ार में
    वाह !सुंदर अभिव्यक्ति

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  3. कल तलक जो कैद थे जेल की दीवार में
    दिख रहे हैं आज वो , देश की सरकार में

    कल तलक जो बंद थे तीर्थों के तीर्थ तिहाड़ में ,

    छा रहें हैं आजकल दिल्ली की सरकार में .

    बहुत धारदार तंज है इंतजामिया पर .

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  4. खूबसूरत प्रस्तुति |
    आभार -

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    1. मुट्ठा मुट्ठा ले भरे, मिला बाप का राज |
      पब्लिक भूखी मर रही, दाने को मुहताज |
      दाने को मुहताज, पीठ पर मुहर लगा के |
      गौ सी सीधी देख, थका दे भगा भगा के |
      बेहद जालिम सांढ़, घूम दिल्ली में छुट्टा |
      इधर उधर मुँह मार, खाय ले मुट्ठा मुट्ठा ||

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  5. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

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  6. सभी शेर में देश के हालात का सटीक वर्णन है. उम्दा प्रस्तुति, बधाई.

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  7. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार 5/2/13 को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका वहां हार्दिक स्वागत है

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  8. सामाजिक बहिस्कार ही इन अपराधियों का दंड है ,हम इन्हे ही अपना प्रतिनिधि बना के अपना भाग्य विधाता बना देते है यही हमारी सबसे बड़ी विडम्बना है

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  9. जिसने लूटी आबरू घुस घरों में बार -बार
    है बन गया वह राक्षस , मुल्क का पहरेदार

    Saare sher achhe lage. Bahut Khoob likha hai.

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  10. चुटीले कटाक्षों के साथ प्रासंगिक प्रस्तुति ! बहुत बढ़िया !

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  11. आपने चुन चुन कर निशान लगाया है और सही लगा .तीखा बन है आपका -बधाई

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  12. मूर्ति चोरी ज़ुर्म में , जो कल गया था जेल में
    बन पुजारी आ गया , भगवान के दरबार में ..

    आज के हालात पे करार व्यंग ... देश का हाल भी कुछ ऐसा ही है आज ...

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  13. बहुत बढ़ियाँ ...
    आज के स्थिति पर परफेक्ट....

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  14. बढ़िया है आदरणीया-
    शुभकामनायें-

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  15. रात में जो रहजनी के खेल में थे होशियार
    हैं बिक रहे उनके कलेण्डर देश के बाज़ार में-------

    वर्तमान का सजीव शब्द चित्र,वाकई कटु सत्य है
    आपकी बेवाक लेखनी को प्रणाम
    उत्कृष्ट प्रस्तुति

    आग्रह है मेरे ब्लॉग में भी सम्मलित हों

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