बुधवार, 13 फ़रवरी 2013

65. मधु सिंह : फेसबुक

  

         फेसबुक

      
      आईए  जी  देखिए, एक   नया  चेहरा  हमारे  गाँव का 
      हर  छोरा - छोरी   गाँव  का   है  फेसबुक पर छा गया 

      गिल्ली- डंडा   डिलिट  हो  गया   गाँव  के  परिवेस से  
      खेत  से  खलिहान तक चेहरा फेसबुक का है आ  गया 

      शब्द   कितने   खो   गए   अब   गाँव   की  चौपाल से 
      छोरा-छोरी  की  जगह  दिल्ली  का बंदा बंदी आ गया 

       है लगी अब  होड़  कैफों में , खाते फ्री में खोले जा रहें               
       फेसबुक, मॉडर्ननिटी  का नया सिम्बल बन आ गया 

       नारा  लग  रहा  है,  दोस्तों  आप  फेसबुक पर आईए 
       बन  झुमरी तलैया प्यार  का  फेसबुक अब छा  गया

       आती-पाती,  घघोरानी, खो  गए  गाँव के परिवेस से 
       साँप -सीढ़ी , खेल  भी  अब  खुद को  ही है  खा  गया 
      
       पहले  फेसिअल करवाईए, फिर फोटो  नई खिचाईये
        पोस्ट  नई  फोटो  करो  का  नारा  गाँव में है छा गया
 
       जल्द  एकाउंट आप  अपना फेसबुक पर  खोलवाईए 
       फेसबुक,  मोडेर्न्निटी  का  चेहरा  नया  बन  छा गया 
      
       गाँव की मासूमियत अब दिखती नहीं है पनघटों पर 
      वो मेरी  लाईक की है ,का बुखार गाँव  में भी छा गया 

       गाँव  की  अमराईयों  में   फेसबुक  है  दिख  रहा अब 
       चेहरा  हमारे  गाँव  का,  जी- मेंल  पर  अब  छा  गया

       भाषा टिप्पड़ी की  फेसबुक पर एक नई अब आ गई 
      असर सहर की भाषा का हमारे गाँव पर भी  आ  गया
                                                        मधु "मुस्कान "