शनिवार, 16 फ़रवरी 2013

68 . मधु सिंह : हटा कर कफ़न तुम मेरी माँग भर दो

     हटा कर कफ़न, तुम मेरी माँग भर दो  

    है  गुज़ारिस  आप से   बदनाम   कर दो 
    अपनी मोहब्बत को हमारे  नाम कर दो

    ज़माने  पर  एक  नया अहसान  कर दो 
    मेरे हवाले अपना मुकम्मल नाम कर दो     
   
    
    मोहब्बत को  उपनिसद  कूरान  कर दो 
    दौरे जहाँ  की एक नई  पहचान कर  दो

    हमारे जिश्म को रूह अपनी दान कर दो 
    रस्मे अलबिदा में, एक  नई जान भर दो

    तप  रहा  है  जिश्म  मेरा  प्यार कर दो
   उन्मुक्त कुन्तल की घनेरी छाँव कर दो
   
   अश्रु  पूरित  नेत्र  मेरे , मुस्कान  भर दो
   प्रेयसी  के  सौम्य सुख  की  चाह भर दो
 
   यामिनी  के  गर्भ   में  मधुमास  भर दो
   प्यार कर दो ,प्यार कर दो प्यार कर दो

   है आखिरी ख्वाहिस पूरे अरमान कर दो  
   ज़नाज़े  को मेरे तुम अपने नाम कर दो

    हटा  कर  कफ़न, तुम मेरी माँग भर दो
    चिता को ,मोहब्बत की ताबीज़ कर दो
   
  

                                मधु "मुस्कान "