सोमवार, 13 मई 2013

मधु सिंह : मत पूँछ ज़माने तू



     मत पूँछ ज़माने तू 


       मत    पूंछ   ज़माने  तू   हम  कैसे   जिए जाते हैं
       अपनों  के  हाथो  से  तो  अब  खून  किए जाते हैं 


        उसने  तो  काट  कर  रख  दी  ज़ुबान कागज़ पर
        इल्ज़ाम   ख़ुद  पे   लगा   हम  तो  जिए  जाते हैं

       जिस  दिन  से  उसने   मुझको घर  से निकाला है
       उस     दिन से  उससे  हम ,फरियाद किए जाते हैं

       मत  पूँछ   मेरे  ज़ख्मों    की  तादात  मेरे  दोस्त
       इन्हीं  ज़ख्मों  के   सहारे  हम याद  किए जाते हैं

       फ़सले  गुल   भी  कयामत   का    हुनर  रखते हैं  
       फ़िर  भी   हम  उसको ही  आवाज़  दिए   जाते हैं

      तोड़, फेंक दिया खुश्क पत्तों सा  जिसने मुझको
      हम   उसी   शाख़  के   ख़्वाबों   पे   जिए  जाते हैं

      होठ पर अंगारे लिए जिस शक्स ने मुझे छेड़ा  था 
      ख़्वाब आईने मे सज़ा उसका हम तो जिए जते हैं 

     
                       
                                                मधु"मुस्कान"
      
    


      

15 टिप्‍पणियां:

  1. आपने लिखा....
    हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए बुधवार 15/05/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    पर लिंक की जाएगी.
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. होठ पर अंगारे लिए जिस शक्स ने मुझे छेड़ा था
    ख़्वाब आईने मे सज़ा उसका हम तो जिए जते हैं waai me ....hm hi nadan h jo unko itna bhaw dete hain bahut acchhi abhiwayakti madhu jee ....

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  3. बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति,आभार

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  4. बहुत खूब, दर्द से भरी दास्ताँ
    मत पूँछ मेरे ज़ख्मों की तादात मेरे दोस्त
    इन्हीं ज़ख्मों के सहारे हम याद किए जाते हैं

    फ़सले गुल भी कयामत का हुनर रखते हैं
    फ़िर भी हम उसको ही आवाज़ दिए जाते हैं

    तोड़, फेंक दिया खुश्क पत्तों सा जिसने मुझको
    हम उसी शाख़ के ख़्वाबों पे जिए जाते हैं

    होठ पर अंगारे लिए जिस शक्स ने मुझे छेड़ा था
    ख़्वाब आईने मे सज़ा उसका हम तो जिए जते हैं

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  5. मत पूँछ मेरे ज़ख्मों की तादात मेरे दोस्त
    इन्हीं ज़ख्मों के सहारे हम याद किए जाते हैं

    Bahut he umda likha hai!

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  6. उसने तो काट कर रख दी ज़ुबान कागज़ पर
    इल्ज़ाम ख़ुद पे लगा हम तो जिए जाते हैं

    यह भी तो अपना ही होंसला है,नहीं तो वोह ऐसा न कर लेता. अच्छी रचना.

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  7. बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति.

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  8. बहुत सुंदर रचना।

    आपकी रचनाएं http://panchayatkimuskan.com/ पर भी प्रकाशित हो सकती है इसके लिए आप अपनी रचनाएं panchayatkimuskan@gmail.com पर ईमेल करें

    धन्यवाद!

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  9. तोड़, फेंक दिया खुश्क पत्तों सा जिसने मुझको
    हम उसी शाख़ के ख़्वाबों पे जिए जाते हैं

    शिद्दत से जिए जाते हैं ,तेरी यादों की टेक लिए .....

    तोड़, फेंक दिया खुश्क पत्तों सा जिसने मुझको
    हम उसी शाख़ के ख़्वाबों पे जिए जाते हैं

    बहुत खूब !

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