रविवार, 19 मई 2013

मधु सिंह : बातें करें


              बातें करें 
           
     

           सरापा   जिश्म  अहिल्या  का  क्यों   हो  गया पत्थर
          चलो   हम  आज  ऋषियों  के  अन्याय  की  बातें करें  

          हाथ दुस्शाशन के लुटी  थी  लाज द्रौपदी की, सभा में 
          क्यों  न  दुर्योधन  की  सभा  में हम लाज़ की बातें करें 

          हरण  सीता  का   हुआ,परीक्षा  आग्नि  में   देनी पड़ी 
          है  हो  गया  ज़रूरी   हम  आज  मर्यादा  की  बातें करें 

          मत्स्यगंधा  भी  हुई  थी   मुनि - बासना  की  शिकार
          क्यों  न  मुनिओं  के  घृणित  व्यभिचार की बातें करें 

         इतिहास  के  हर  पृष्ठ है  अंकित कहानी अन्याय की
         भूल  कर   भी  न  हम  इनके  दुहराने  की  बातें  करें 

         कहानी  छोड़  पीछे  की चलो  हम आज  की बातें करें 
         है कहानी  रोज दुहराई जाती यहाँ ,सर झुका बातें करें 
     
          बन  झुनझुने हम हाथ के,क्यों हो गये हैं आज बेबस 
         चलो  अन्याय  की  छाती पर मूँग दलने की बातें करें 

          आगाज़ तो  है सामने  रहनुमाओं के घिनौने कृत्य का 
         मिटा हस्ती दरिंदों की बेशक ,नए अंजाम की बातें करें  
       
                                                 मधु"मुस्कान"