मंगलवार, 18 दिसंबर 2012

27.Madhu Singh ;Aayeene

        आईने                                                                                                                                                                                                                                                                                                                         आईने  भी  साथ  देने से अब  कतराने लगे  हैं
      देख चेहरा आईनों  में हम आज घबराने लगे हैं

      हुआ जो हादसा कल उस जगह घर  के भीतर
      देख  उसको हम सभी आज  सब शर्माने लगे हैं

    किस से सिकायत हम करें जिंदगी के हादसों की
    अब चोर,जज़ सभी के हाथ खंजर लहराने लगे हैं  
  
    नकाब उसका जब हटाया गया भरी अदालत में
     जज अदालत के सभी अपने चेहरे छुपाने लगे हैं  

   अपनों को कभी उसने जब आज तक बक्शा नहीं
   फिर गैरों की बात पर क्यों आप बहकाने   लगे हैं   

    अपनों के कत्ल के  इलज़ाम ख़ुद पर  ही लगे हों    
    तुगलकी चाल फिर  हम उसे क्यों बतलाने लगे हैं

    लावारिस पड़ी  हैं आज लाशें हर घरों में बेशुमार 
    हम  बारूद के घर  अपना  ख़ुद  ही बनाने लगे है

                                                 मधु"मुस्कान"



4 टिप्‍पणियां:

  1. वाह !!
    पूरी ग़ज़ल एक हकीकत...बधाई !!

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  2. वाह मधु जी क्या लाजवाब ग़ज़ल सब के सब अशआर खूबसूरत हैं दाद कुबूल करें

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  3. बहुत खूब मधु दी ,वेहद तल्ख़ सच्चाई से रूबरू कराती ग़ज़ल ,इस ग़ज़ल के स्वागत में पेश है ******^^^^^*******जिन्दगी से मौत भी है अब डरने लग गयी है ,घर,घरौंदे ,ख्वाब सारे अपनों ने ही उजड़े हैं "नकाब उसका जब हटाया गया भरी अदालत में
    जज अदालत के सभी अपने चेहरे छुपाने लगे हैं

    अपनों को कभी उसने जब आज तक बक्शा नहीं
    फिर गैरों की बात पर क्यों आप बहकाने लगे हैं

    अपनों के कत्ल के इलज़ाम ख़ुद पर ही लगे हों
    तुगलकी चाल फिर हम उसे क्यों बतलाने लगे हैं

    लावारिस पड़ी हैं आज लाशें हर घरों में बेशुमार
    हम बारूद के घर अपना ख़ुद ही बनाने लगे है......"

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