गुरुवार, 6 दिसंबर 2012

20 .Madhu Singh :Eklavya

           


    एकलव्य
   आज मै बहुत खुश हूँ 
   इसलिए की आज मैंने 
   वह सब देख और सुन लिया 
   कि कैसे आज आखिरकार  
   आज के एकलव्य ने अपने गुरु 
   द्रोणाचार्य से बदला ले ही लिया 
   और इतिहास के मुह पर 
   एक जोरदार तमाचा जड़ 
   महाभारत में अपनी उपस्थिति 
   दर्ज कर कर उसने   
   द्रोणाचार्य को अपने इरादों को 
  साफ साफ बतला दिया 
  न अंगूठा दिया  और न ही अंगूठा दिखाया(1)
  बल्कि  उनका  अंगूठा ही  काट 
  उन्हें  ठेंगा दिखा चलदिया 
  और  इस  नए  अंदाज में 
  महाभारत के  इतिहास में उसने 
  अपनी अनुपस्थिति  का बदला ले 
  कलयुगी द्रोडाचार्यों को 
  अंगूठे की राजनीती के खरनाक 
  अंजाम का पाठ पढ़ा गया 
                मधु "मुस्कान "

  (1) अज़ीज़  जौनपुरी ने अंगूठा दिखाने का उल्लेख किया है 

लखनऊ से  यह प्रस्तुति आप के मध्य  मेरे शीघ्र आगमन का  संकेत है )