गुरुवार, 27 दिसंबर 2012

31.मधु सिंह : न शर्माओ तुम

            


       न शर्माओ तुम 


     मेरे  पास   आओ  ,   मुझे   अपना  बना लो  
     खुशबू  सांसों को  तुम  अपनी सांसें बना लो 

    थाम लो वक्त को है बहुत तेज रफ़्तार  अब 
    मौजे दरिया का मुझको तुम  साहिल बना लो 

     समंदर  में  डूबे, चलो  एक साथ हम- तुम 
    अपनी  आँखों  को   मेरा  समंदर  बना  लो 

    रहें उस  समंदर में  बस  हम ता उम्र  डूबे 
    मेरी  धड्कन  को अपनी धड्कन बना लो

    चन्द  लम्हे  ही  हैं, अब  बचे  जिन्दगी  के 
    मुझको  बाँहों  भर उनको सदियाँ बना लो 

    साँस की तो बहुत तेज रफ़्तार,हो गई अब 
    मेरी  सांसों  को तुम अपनी  सांसे बना लो 

     है नया वर्ष आया बन खुशिओं का  दस्तक
     सारे  ख्वाबों  तुम  एक  हकीकत बना लो
  
     पास  आकर मेरे  तुम सिर्फ  बाँहों में  बैठो 
     सारी खुशियाँ जहाँ की तुम अपना बना लो 

     पंखुड़ी पर गुलाबों के एक सन्देश लिख कर 
     ज़िन्दगी  भर की  खुशियाँ दिल में सजा लो 

   

                                     मधु "मुस्कान"