शनिवार, 15 दिसंबर 2012

24.Madhu Singh: Kyon Chal Diye Tum

       क्यों चल दिए 


लिए थे सात फेरे, कुछ कसमे भी खाईं थी 
छोड़  मुझको अकेली  क्यों चल दिए तुम 

जो कसमे ली हमने साथ जीने - मरने की 
तोड़  कसमो  को किस डगर चल दिए तुम 

मै  अकेली  किस   भरोसे  अब   जियूंगी 
बिन कहे कुछ हो  चुप क्यों चल दिए तुम 

कुछ  कहा भी नहीं क्यों कुछ सुना भी नहीं 
बंद पलकें  किए  क्यों चुप  चल  दिए तुम

कल तक तो  निभाई  तुमने  कसमे  सभी   
क्या हुआ आज क्यों धोखे से चल दिए तुम 

मै अकेली यहाँ  किससे  सुख दुःख कहूँगी 
माँग  मेरी  क्यों सूनी  कर  चल  दिए तुम  

साथ मरने का वादा क्यों  तुमने किया था
मुझको  बेसहारा  कर  क्यों छल   गए तुम 

रंग  तुमको  न  भाया जो सारी  उमर  भर 
क्यों उस सफेदी में रंग,छोड़ चल दिए तुम
 
संग तुम्हारे चलूँ,या वह  निशानी ले  जियूं 
कोख़ में रख जिसे चुप-चाप चल दिए  तुम 

क्या  बताउंगी  उसे  जब  वो  पूछेगा  तुम्हे 
बात  मनो मेरी  रूक भी जाओ  यहीं  तुम 

आज तक तो तुमने न जिद कभी भी किया 
दे किस खता की सजा  क्यों  चल  दिए तुम 

जाओ जाओ न रोकूंगी अब मै तुझे,देखो मुझे 
बिन निहारे  मुझे  क्या  जा  भी  पाओगे तुम  

                                 मधु  "मुस्कान"