शुक्रवार, 21 दिसंबर 2012

28.Madhu Singh:Bs Ek Bar

      बस एक बार 




      लपटें, खुद-ब- खुद उठ  जायगी  चिनगारियो से 
      बस,एक बार आप जरा  खुद को तो आजमाईए     
     
      खुद - ब- खुद  मुड़  जायगा  रुख  आन्धिओं का  
      बस,एक बार आप   जरा  हिम्मत  तो दिखाईए 

      बिस्फोट, खुद-ब- खुद  हो जायगा चंद लमहों में 
      बस,एक बार आप तीली माचिस की तो जलाईए  

      बेड़ियाँ मजबूरिओं की ख़ुद- ब -ख़ुद खुल जायगी 
     बस, एक बार आप  अपने  कदमों को तो बढाईए   

     बुज़दिली,खुद -ब -खुद बन  कर  धुवां उड़ जायगी  
     बस,एक बार आप आग अपने सीने में तो जलाईए 

     खुद-ब-ख़ुद मुड़ जायगा रुख नदी का अपनी तरफ  
     बस,एक बार आप मशालें अपने दिल की जलाईए     
                                                     मधु"मुस्कान"

     

    

     
     
  
    
 

8 टिप्‍पणियां:

  1. बुज़दिली,खुद -ब -खुद बन कर धुवां उड़ जायगी
    बस,एक बार आप आग अपने सीने में तो जलाईए


    बहुत बढ़िया आंटी!


    सादर

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति..!
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (23-12-2012) के चर्चा मंच-1102 (महिला पर प्रभुत्व कायम) पर भी की गई है!
    सूचनार्थ!

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  3. खुद - ब- खुद मुड़ जायगा रुख आन्धिओं का
    बस,एक बार आप जरा हिम्मत तो दिखाईए,,,

    बहुत खूब उम्दा प्रस्तुति,,, मधु जी,,,,

    recent post : समाधान समस्याओं का,

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  4. इरादों को हवा देती सुन्दर अभिव्यक्ति.कभी आप हाथ में खंजर उठाने को मजबूर कर देती हैं तो कभी मोहब्बत के तरानों को छेड़ देती है

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  5. हिम्मत करे इंसान तो क्या कर नहीं सकता !

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  6. प्रेरणादायी रचना..
    बुज़दिली,खुद -ब -खुद बन कर धुवां उड़ जायगी
    बस,एक बार आप आग अपने सीने में तो जलाईए
    बहुत सही बात,,,

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