गुरुवार, 21 मार्च 2013

मधु सिंह : तेरा शाना न था

         तेरा शाना न था 

   उफ़,    मेरी    वफ़ात   पे ,  तेरा  शाना  न था              
   जब   मेरी   मैयत   उठी,  मेरा  दीवाना न था 

    फ़ज़ा  में यूँ ही नहीं  नीलम हो  गईं  सांसे मेरी 
    मौत की खामोशियाँ  थी, उसका  आना न था 
    
    चन्द    रोज़ा   और   भी  जी  लेते   उधार में 
     ये मेरी  बेचारगी  थी  , मेरा   परवाना  न था 

    अफ़सोस,   तमाम   उम्र   मैं   मुंतज़िर  रहा               
    ये अज़ाब था ख़ुलूस का,मौत का आना न था 

    मुद्दतों ढूँढ़ा करेंगीं मेरी जूस्तजू,मेरी ख्वाहिशें
    ज़ुर्म था  ज़मीर   का , यूँ हीँ मेरा जाना न था 

    दो गज़ जमी भी न मयस्सर हुई उल्फत को 
    मेरे गुनाह थे,मेरा ज़ुर्म था,मेरा दीवाना न था

    वफ़ात - मौत , शाना -कन्धा , मुन्तज़िर -प्रतीक्षा रत ,
    अज़ाब -मुसीबत , ख़ुलूस -सच्चाई

                                            मधु "मुस्कान"

   
 
 

8 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 23/03/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  2. उफ़, मेरी वफ़ात पे , तेरा शाना न था
    जब मेरी मैयत उठी, मेरा दीवाना न था

    ....बहुत उम्दा...भावपूर्ण मर्मस्पर्शी ग़ज़ल...

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  3. जहाँ एक तरफ वेदना के स्वर मुखर हो रहे हैं वहीं
    दूसरी तरफ चाहत की उत्कट अभिलाषा , बेहद संवेदनशील प्रस्तुति न्यू पोस्ट -हाथ मिला कर*** उफ़,मेरी वफ़ात पे , तेरा शाना न था
    जब मेरी मैयत उठी, मेरा दीवाना न था

    फ़ज़ा में यूँ ही नहीं नीलम हो गईं सांसे मेरी
    मौत की खामिशियाँ थी, उसका आना न था

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  4. फाग मुबारक फाग की रीत और प्रीत मुबारक

    बहुत प्यारी गजल कही है -

    अफ़सोस, तमाम उम्र मैं मुंतज़िर रहा
    ये अज़ाब था ख़ुलूस का,मौत का आना न था
    अलफ़ाज़ के मनाई कहके और भी कीमत बढ़ा दी है आपने -अज़ाब का एक मतलब ज़लज़ला भी होता है ,ज़लज़ला बोले तो भू कंप -

    आये कुछ अब्र ,कुछ शराब आये ,

    उसके बाद आये जो अज़ाब आये .

    कर रहा था गेम जहां का हिसाब ,

    आज तुम बे -हिसाब याद आये .

    जवाब देंहटाएं
  5. Virendra Sharma ‏@Veerubhai1947 32m
    ram ram bhai
    मुखपृष्ठ
    शनिवार, 23 मार्च 2013
    आखिर सारा प्रबंध इटली का ही तो है यहाँ .

    http://veerubhai1947.blogspot.in/
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    Virendra Sharma ‏@Veerubhai1947 38m
    इटली के ही पास गिरवीं है भारत की नाक http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/2013/03/blog-post_23.html …
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  6. बहुत प्यारी गजल कही है -

    अफ़सोस, तमाम उम्र मैं मुंतज़िर रहा
    ये अज़ाब था ख़ुलूस का,मौत का आना न था
    अलफ़ाज़ के मानी (मायने ) कहके और भी कीमत बढ़ा दी है आपने -अज़ाब का एक मतलब ज़लज़ला भी होता है ,ज़लज़ला बोले तो भू कंप -

    आये कुछ अब्र ,कुछ शराब आये ,

    उसके बाद आये जो अज़ाब आये .

    कर रहा था गेम जहां का हिसाब ,

    आज तुम बे -हिसाब याद आये .

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  7. Virendra Sharma ‏@Veerubhai1947 33m
    ram ram bhai
    मुखपृष्ठ
    शनिवार, 23 मार्च 2013
    आखिर सारा प्रबंध इटली का ही तो है यहाँ .

    http://veerubhai1947.blogspot.in/
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    Virendra Sharma ‏@Veerubhai1947 39m
    इटली के ही पास गिरवीं है भारत की नाक http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/2013/03/blog-post_23.html …
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