सोमवार, 21 जनवरी 2013

47.मधु सिंह : नाँच रही थी


  नाँच रही थी 



     मैं  छत पर से देख रहा था,तुम  खिड़की से झाँक रही थी 
     बांध के अपने पाँव में पायल बन मीरा तुम नाँच रही थी 
     नाँच रही थी  ,नाँच रही थी  ,नाँच रही थी ,नाँच रही थी ........
     कह, कह, कह, कह कर तुम  ता ता थईया 
     बन मीरा तुम  नाँच रही ,नाँच रही थी, नाँच रही थी ........

    जब जब मैंने तुमको देखा ,तुम खिड़की से झाँक रही थी 
    हाथ में लेकर मेरे खतों को छुप-छुप कर तुम बाँच रही थी  
    बाँच रही थी , नाँच रही थी ,नाँच रही थी , नाँच रही थी ........
    कह, कह, कह, कह कर तुम   ता ता थईया, 
    बन मीरा  तुम नाँच रही थी  ,नाँच रही थी, नाँच रही थी ........

    मैंने जब- जब तुमको देखा, कदम की आहट भाँप रही थी 
    सज धज कर , बन मीरा  तुम  प्यार हमारा जाँच रही थी 
    जाँच  रही थी , नाँच रही थी ,नाँच रही थी , नाँच रही थी ........
    कह, कह, कह, कह कर तुम  ता ता थईया, 
    बन मीरा  तुम नाँच रही ,नाँच रही थी, नाँच रही थी ........

     जब- जब  मैंने तुमको देखा , चाहत  मेरी माप रही थी 
     प्यार के गहरे सागर में तुम पग पग मेरा नाप रही थी 
     नाप रही थी, नाँच रही थी ,नाँच रही थी , नाँच रही थी ........
     कह, कह, कह, कह कर तुम  ता ता थईया,
     बन मीरा  तुम नाँच रही थी  ,नाँच रही थी, नाँच रही थी ........

    जब जब मैंने तुमको देखा ,तुम चेहरे को ढाँप रही थी 
    ओढ़ प्रेम की केसर चूनर, पावं में घूँघर बांध रही थी 
    ढाँप रही थी, नाँच रही थी ,नाँच रही थी , नाँच रही थी ........
    कह, कह, कह, कह कर तुम  ता ता थईया,
    बन मीरा  तुम नाँच रही ,नाँच रही थी, नाँच रही थी ........

    सारी  दुनिया नाँच रही  थी , झूम  रही थी ,नाँच  रही थी ,झूम रहीथी 
    ताक धिना धिन ,ता ता थैया , ताक  धिना धिन ,ताता थैया ,कह कह कह कर  नाँच रही  थी 
    नाँ ............च ........रही ..............थी ,नाँ  .....................च .................... रही ...............थी 
   

                                                                                                                       मधु "मुस्कान"