बुधवार, 30 जनवरी 2013

53. मधु सिंह : रमकली के पेट में



    
           रमकली के पेट में 


        रमकली  के  पेट  में , है  जिसका  बच्चा  पल  रहा 
       बैठ भेड़िये के खाल में ,खैनी  हाथ में  है  मल  रहा 

        है  वही सरपंच  बैठा , हवस  की  आग में  है जल रहा 
        कितनी  बेटिओं  को  वह  दरिंदा, रोज ही था  छल रहा 

       खेत था सरपंच का ,बगीचा उसका पास में  था फल रहा 
       रमकली  को   देख ,रोज अपना  हाथ था  वह  मल  रहा

       एक  दिन  बन  भेड़िया , वह  था  घात  में  बैठा  वहीं
       रमकली का जिश्मका था हर रोज उसको  छल रहा 

       निकल  खेत  से  वह  ज्यों  हीं , दो  कदम  आगे  चली
       देख  उसको  पास  अपने  कुछ तेज  गति  से वह बढ़ी 

       दो  कदम  भी  न  वह  बढ़  आगे  सकी  थी  सरपंच के 
       तभी, उस  अभागन  पर  नजरें  पड़  गईं  सरपंच  की 

       देखते  ही  देखते,खींच उसको बाँहों में अपने भर लिया 
       छटपटाई  वह  मगर , पर  काबू  में  उसको कर लिया 

       उस  भेड़िये  सरपंच  का  चेहरा  खिल गया उल्लास से
       पर , रमकली  के  जिश्म का  कौमार्य  सारा जल गया 

       है ,  कहानी  यह  नहीं  सिर्फ  रमकली  के  ही  गाँव की
       हर  गाँव  में सरपंच हैं , है कहानी मुल्क के हर गाँव की 

        1.सरपंच - सत्तासीन  व्यक्ति या शक्ति संपन्न व्यक्ति 
        2.रमकली -एक काल्पनिक नाम 

                                                         मधु "मुस्कान"