गुरुवार, 24 जनवरी 2013

50.मधु सिंह :दिल्ली की है ग़जब कहानी(2) काली बिल्ली

      काली बिल्ली 

    रो -रो कहती आज बेटियाँ
     नहीं जाउंगी मै अब  दिल्ली  
     जब भी निकलो, जिधर से निकलो 
      रस्ता काटे काली बिल्ली 


  
      घुट -घुट कर मरती है दिल्ली 
     खून से लथपथ है अब दिल्ली
     काली करनी काली धरनी 
     काली करतूतों की दिल्ली


     काले कौवे शोर मचाते 
     कोयल की है उड़ती खिल्ली 
     मर्यादा का चीर हरण कर 
     सभी यहाँ हैं सेखनं  चिल्ली

      कभी रही अशोक की दिल्ली
      आज बनी  है शोक  की दिल्ली 
      पांडवों की थी जुड़ी कहानी 
       हुई आज तुगलक की दिल्ली 

      पृथ्वी राज की सान थी दिल्ली 
      मर्यादा की जान थी दिल्ली
      तार-तार मर्यादा कर दी 
      आज हुई नंगों की दिल्ली 

      क्या कहूँ आज रोती अब दिल्ली 
      चीर हरण की बस्ती दिल्ली 
      रो रही आज हैं  सभी बेटियाँ 
       हुई आज यह काली बिल्ली 

      राज घाट पर बापू रोते 
     रो ती है अब देश की  दिली 
     सत्य अहिंसा की मत पूछों 
      हुई आज निर्वसन है दिल्ली   

     जहाँ जहाँ तुम आँख रखोगे 
     दिख जाएगी काली बिल्ली
     मान प्रतिष्ठा जल खाक हो गई 
     कौवों की जमघट है दिल्ली 

     दिल्ली अब नाम बदल दो 
      नाम लिखो अब काली बिल्ली
     दिल है काला काली दिल्ली 
     हुई आज  नागों  की दिल्ली 

     यमुना की जलधार मर गई 
     रोज लुटाती अस्मत दिल्ली 
     नाग नाथ औ साप नाथ मिल 
     सुबह शाम सब लूटें दिल्ली 

      दिल्ली  का दिल दहल गया है                                                                    
      रोज रोज का बम है दिल्ली 
      संसद भी महफूज नहीं अब 
      दिल्ली  हो गई काली बिल्ली 
        
   (दिल्ली की है गज़ब कहानी (3)अतिशीघ्र )

                                             
   (प्रेरणा  श्रोत -आदरणीय ,डॉक्टर  बागीश  जी )

                        मधु "मुस्कान "